रविवार, 20 फ़रवरी 2011

दयानंद वैदिक महाविद्यालय, उरई में UGC द्वारा प्रायोजित राष्ट्रिय सेमीनार == 13-14 मार्च 2011

दयानंद वैदिक महाविद्यालय, उरई में UGC द्वारा प्रायोजित राष्ट्रिय सेमीनार == 13-14 मार्च 2011







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दयानंद वैदिक महाविद्यालय, उरई में UGC द्वारा प्रायोजित राष्ट्रिय सेमीनार -- date-27-28 मार्च 2011

दयानंद वैदिक महाविद्यालय, उरई में UGC द्वारा प्रायोजित राष्ट्रिय सेमीनार == 27-28 मार्च 2011





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शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

कृष्ण कुमार यादव को ‘’ डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-२०१०''

भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा कृष्ण कुमार यादव को ‘’ डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2010‘‘
भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने युवा साहित्यकार एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव को अपने रजत जयंती वर्ष में ‘’ डा. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान-2010‘‘ से सम्मानित किया है। श्री यादव को यह सम्मान साहित्य सेवा एवं सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। श्री कृष्ण कुमार यादव वर्तमान में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर कार्यरत हैं.
सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय 33 वर्षीय श्री कृष्ण कुमार यादव की रचनाधर्मिता को देश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में देखा-पढा जा सकता हैं। विभिन्न विधाओं में अनवरत प्रकाशित होने वाले श्री यादव की अब तक कुल 5 पुस्तकें- अभिलाषा (काव्य संग्रह), अभिव्यक्तियों के बहाने (निबन्ध संग्रह), अनुभूतियां और विमर्श (निबन्ध संग्रह) और इण्डिया पोस्टः 150 ग्लोरियस ईयर्स, क्रान्ति यज्ञः 1857 से 1947 की गाथा प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डाॅ0 राष्ट्रबन्धु द्वारा श्री यादव के व्यक्तित्व व कृतित्व पर ‘‘बाल साहित्य समीक्षा‘‘ पत्रिका का विशेषांक जारी किया गया है तो इलाहाबाद से प्रकाशित ‘‘गुफ्तगू‘‘ पत्रिका ने भी श्री यादव के ऊपर परिशिष्ट अंक जारी किया है। शोधार्थियों हेतु आपके जीवन पर एक पुस्तक ‘‘बढ़ते चरण शिखर की ओर : कृष्ण कुमार यादव‘‘ ( स0 डा0 दुर्गाचरण मिश्र) भी प्रकाशित हुई है। श्री यादव की रचनायें पचास से ज्यादा संकलनों में उपस्थिति दर्ज करा रहीं हैं और आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर और पोर्टब्लेयर से भी उनकी रचनाएँ और वार्ता प्रसारित हो चुके हैं. श्री कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग में भी सक्रिय हैं और ‘शब्द सृजन की ओर‘ और ‘डाकिया डाक लाया‘ नामक उनके ब्लॉग चर्चित हैं.
ऐसे विलक्षण व सशक्त, सारस्वत सुषमा के संवाहक श्री कृष्ण कुमार यादव को इससे पूर्वे विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘’महात्मा ज्योतिबा फुले फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान -2009‘‘, भारतीय बाल कल्याण संस्थान द्वारा ‘‘प्यारे मोहन स्मृति सम्मान‘‘, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा काव्य शिरोमणि-2009 एवं महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला‘ सम्मान, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘‘भारती रत्न‘‘, मध्य प्रदेश नवलेखन संघ द्वारा ‘‘साहित्य मनीषी सम्मान‘‘ व ‘‘भाषा भारती रत्न‘‘, साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी, प्रतापगढ द्वारा '' विवेकानंद सम्मान'' , महिमा प्रकाशन, दुर्ग-छत्तीसगढ द्वारा ''महिमा साहित्य भूषण सम्मान'' नगर निगम डिग्री कालेज, अमीनाबाद, लखनऊ द्वारा ‘‘सोहनलाल द्विवेदी सम्मान‘‘, अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा द्वारा ‘‘कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान‘‘ व ‘‘महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान‘‘, अन्तर्राष्ट्रीय सम्मानोपाधि संस्थान, कुशीनगर द्वारा ‘‘राष्ट्रभाषा आचार्य‘‘ व ‘‘काव्य गौरव‘‘, इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्था, बिजनौर द्वारा ‘‘साहित्य गौरव‘‘ व ‘‘काव्य मर्मज्ञ‘‘, दृष्टि संस्था, गुना द्वारा ‘‘अभिव्यक्ति सम्मान‘‘, छत्तीसगढ़ शिक्षक-साहित्यकार मंच द्वारा ‘‘साहित्य सेवा सम्मान‘‘, आसरा समिति, मथुरा द्वारा ‘‘ब्रज गौरव‘‘, श्री मुकुन्द मुरारी स्मृति साहित्यमाला, कानपुर द्वारा ‘‘साहित्य श्री सम्मान‘‘, मेधाश्रम संस्था, कानपुर द्वारा ‘‘सरस्वती पुत्र‘‘, खानाकाह सूफी दीदार शाह चिश्ती, ठाणे द्वारा ‘‘साहित्य विद्यावाचस्पति‘‘, उत्तराखण्ड की साहित्यिक संस्था देवभूमि साहित्यकार मंच द्वारा ‘‘देवभूमि साहित्य रत्न‘‘, सृजनदीप कला मंच पिथौरागढ़ द्वारा ‘‘सृजनदीप सम्मान‘‘, मानस मण्डल कानपुर द्वारा ‘‘मानस मण्डल विशिष्ट सम्मान‘‘, नवयुग पत्रकार विकास एसोसियेशन, लखनऊ द्वारा ‘‘साहित्यकार रत्न‘‘, महिमा प्रकाशन छत्तीसगढ़ द्वारा ‘‘महिमा साहित्य सम्मान‘‘, राजेश्वरी प्रकाशन, गुना द्वारा ‘‘उजास सम्मान‘‘ व ’’अक्षर शिल्पी सम्मान’’, न्यू ऋतम्भरा साहित्यिक मंच, दुर्ग द्वारा ‘‘ न्यू ऋतम्भरा विश्व शांति अलंकरण‘‘, राजेश्वरी प्रकाशन, गुना (म0प्र0) द्वारा ’’अक्षर शिल्पी सम्मान-2010’’ , साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ''हिंदी भाषा भूषण-2010'' इत्यादि तमाम सम्मानों से अलंकृत किया गया है। ऐसे युवा प्रशासक एवं साहित्य मनीषी कृष्ण कुमार यादव को इस सम्मान हेतु बधाईयाँ।

गोवर्धन यादव
संयोजक-राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, छिन्दवाड़ा
103 कावेरी नगर,
छिन्दवाड़ा (म0प्र0)-480001

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पोर्टब्लेयर में कवि सम्मेलन

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पोर्टब्लेयर में कवि सम्मेलन

हिन्दी साहित्य कला परिषद, पोर्टब्लेयर द्वारा गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दक्षिण अंडमान के उप मंडलीय मजिस्ट्रेट श्री राजीव सिंह परिहार मुख्य अतिथि थे और कार्यक्रम की अध्यक्षता चर्चित युवा साहित्यकार और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने की. दूरदर्शन केंद्र पोर्टब्लेयर के सहायक निदेशक श्री जी0 साजन कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे. कार्यक्रम का शुभारम्भ द्वीप प्रज्वलन द्वारा हुआ.

इस अवसर पर द्वीप समूह के तमाम कवियों ने अपनी कविताओं से शमां बांधा, वहीँ तमाम नवोदित कवियों को भी अवसर दिया गया. एक तरफ देश-भक्ति की लहर बही, वहीँ समाज में फ़ैल रहे भ्रष्टाचार, महंगाई और अन्य बुराइयाँ भी कविताओं का विषय बनीं. कविवर श्रीनिवास शर्मा ने देश-भक्ति भरी कविता और द्वीपों के इतिहास को छंदबद्ध करते कवि सम्मलेन का आगाज किया. जगदीश नारायण राय ने संसद की स्थिति को शब्दों में ढलकर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया. जयबहादुर शर्मा ने महंगाई को इंगित किया तो उभरते हुए कवि ब्रजेश तिवारी ने गणतंत्र की महिमा गाई. डा0 एम0 अयया राजू ने आज की राजनैतिक व्यवस्था पर कविता के माध्यम से गहरी चोट की तो डा0 रामकृपाल तिवारी ने यह सुनकर सबको मंत्रनुग्ध कर दिया कि नेताओं के चलते 'तंत्र' ही बचा और 'गण' गायब हो गया. श्रीमती डी0 एम0 सावित्री ने कविताओं के सौन्दर्य बोध को उकेरा तो डा0 व्यासमणि त्रिपाठी ने ग़ज़लों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. अन्य कवियों में संत प्रसाद राय, अनिरूद्ध त्रिपाठी, बी0 के0 मिश्र, राजीव कुमार तिवारी, सदानंद राय, एस0 के0 सिंह, रामसिद्ध शर्मा, रामसेवक प्रसाद, परशुराम सिंह, डा0 मंजू नायर एवं श्रीमती रागिनी राय ने अपने काव्य पाठ द्वारा काव्य संध्या को यादगार शाम बना दिया। मुख्य अतिथि श्री राजीव सिंह परिहार ने भी हिन्दी कविता की आस्वादन प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए स्वरचित कविताओं का पाठ किया।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए चर्चित युवा साहित्यकार और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ श्री कृष्ण कुमार यादव ने सामाजिक परिवर्तन में कविता की क्रांतिकारी भूमिका की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। आज के लेखन में राष्ट्रीय चेतना की कमी और राष्ट्रीयता के विलुप्त होने की प्रवृत्ति के भाव पर रचनाकारों को सचेत करते हुए उन्होंने कविता को प्रभावशाली बनाने पर जोर दिया। श्री यादव ने जोर देकर कहा कि कविता स्वयं की व्याख्या भी करती है एवं बहुत कुछ अनकहा भी छोड़ देती है। इस अनकहे को ढूँढ़ने की अभिलाषा ही एक कवि-मन को अन्य से अलग करती है। ऐसे में साहित्यकारों और कवियों का समाज के प्रति दायित्व और भी बढ़ जाता है. उन्होंने परिषद द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यभूमि से कटे होने के बावजूद भी यहाँ जिस तरह हिंदी सम्बन्धी गतिविधियाँ चलती रहती हैं, वह प्रशंसनीय है.

कार्यक्रम के आरम्भ में परिषद के अध्यक्ष श्री आर0 पी0 सिंह ने उपस्थिति का स्वागत किया, जबकि प्रधान सचिव श्री बी0 के0 मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कवि सम्मेलन का संयोजक एवं संचालन हिंदी साहित्य कला परिषद् के साहित्य सचिव डा0 व्यासमणि त्रिपाठी ने किया।

डा0 व्यासमणि त्रिपाठी
साहित्य सचिव- हिंदी साहित्य कला परिषद्,
पोर्टब्लेयर-744101
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

डॉ0 ब्रजेश कुमार प्रधान सम्पादक--स्पंदन का निधन


उत्तर प्रदेश के उरई शहर के दयानन्द वैदिक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व प्राध्यापक एवं साहित्यिक पत्रिका स्पंदन के प्रधान सम्पादक डॉ0 ब्रजेश कुमार का कल प्रातः निधन हो गया। डॉ0 ब्रजेश कुमार की शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई और अध्ययन पूर्ण करने के बाद उन्होंने उरई को अपनी कर्मस्थली के रूप में चयनित किया।

साहित्यिक प्रतिभा के धनी डॉ0 ब्रजेश का रंगमंच के प्रति भी जबरदस्त लगाव था। उन्होंने उरई जैसे छोटे से शहर में आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व जबकि शहर में रंगमंचीय कार्यक्रमों के प्रति लोगों की विशेष रुचि नहीं थी, तब उन्होंने थैंक्यू मिस्टर ग्लॉड, लहरों के राजहंस, घासीराम कोतवाल जैसे विश्वप्रसिद्ध नाटकों का मंचन करवाया। रंगमंच और सांस्कृतिक कार्यों के प्रति विशेष रुचि रखने के कारण ही उन्होंने 25 वर्ष पूर्व सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय संस्था वातायन की स्थापना कर शहर में सांस्कृतिक वातावरण का निर्माण किया।

रंगमंच के प्रति स्नेह और साहित्य- लेखन के प्रति अनुराग रखने के कारण उन्होंने कई नाटकों तथा कविताओं की सर्जना की। ओरछा की नगरबधू, लाला हरदौल आदि जैसे स्थानीय विषयों के द्वारा उन्होंने बुन्देली संस्कृति को भी जनता के सामने रखा। साहित्य अनुराग के कारण ही वे सेवानिवृत्ति के बाद भी साहित्य से जुड़े रहे।

उरई को अपनी कर्मस्थली बनाने वाले डॉ0 ब्रजेश कुमार ने यहीं से चौमासिक साहित्यिक पत्रिकास्पंदन का प्रकाशन भी शुरू किया। उनके प्रधान सम्पादकत्व में निकलने वाली स्पंदन ने अपने अल्प समय में ही काफी प्रसिद्धि प्राप्त की और देश-विदेश में नाम कमाया।

अपनी सेवानिवृत्ति के बाद वे काफी समय तक उरई शहर में ही रहे और फिर अपनी आयु और शारीरिक अस्वस्थता के कारण वे अपने इकलौते पुत्र अभिनव उन्मेश कुमार के साथ रहने लगे। अन्तिम समय तक वे किसी न किसी रूप से स्वयं को सक्रिय बनाये रखे रहे। वे अपने पीछे अपनी पत्नी, पुत्री-दामाद, पुत्र-पुत्रबधू, नाती-नातिनों को छोड़ गये।

यह और बात है कि अपनी शारीरिक अस्वस्थता के कारण डॉ0 ब्रजेश कुमार अन्तिम समय में रंगमंच और साहित्य से पूर्ण रूप से नहीं जुड़े रह सके किन्तु यह सत्य है कि उनका जाना रंगमंच के क्षेत्र में, साहित्य के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है। इस क्षति को लम्बे समय तक भरा जा पाना सम्भव नहीं है। उन्होंने उरई जैसे छोटे नगर को रंगमंच के प्रति, साहित्य के प्रति जागरूक किया और यहां के लोगों में इनके प्रति लगाव भी पैदा किया।

विशेष- डॉ0 ब्रजेश कुमार द्वारा रचित कविताओं को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

स्पंदन पत्रिका का इंटरनेट संस्करण यहाँ से देखा जा सकता है



शनिवार, 29 जनवरी 2011

संतोष श्रीवास्तव की पुस्तक --- ' मुझे जन्म दो मां' --- का लोकार्पण


' मुझे जन्म दो मां' (संतोष श्रीवास्तव) का लोकार्पण समारोह

जमीनी सच्चाईयों से जूझती किताब
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मुम्बई : १५ जनवरी २०११ को जे।जे.टी यूनिवर्सिटी झुंझुनू [राज.] के तत्वावधान में चर्चित कथा लेखिका संतोष श्रीवास्तव के नारी विमर्श पर उनकी सामयिक प्रकाशन दिल्ली से सध्य प्रकाशित पुस्तक ''मुझे जन्म दो मां'' का लोकार्पण समारोह नजमा हेपतुल्ला सभागार सांताक्रुज [पूर्व] में मुख्य अतिथि डा. करुणा शंकर उपाध्याय एवं अध्यक्ष सुधा अरोड़ा द्वारा किया गया। इसी अवसर पर हाल ही 'संगिनी' पत्रिका की संपादक और स्त्री विषयक कार्यों को अंजाम देने वाली एवं "लाडली मीडिया लाईफ़ टाईम अचीवमेंट'' से पुरस्कृत दिव्या जैन का संस्था ने विशेष सम्मान भी किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री विनोद टीबड़ेवाला के स्वागत भाषण से हुआ। तत्पश्चात पुस्तक की प्रस्तावना देते हुए कथा लेखिका प्रमिला वर्मा ने कहा कि इस पुस्तक में लेखिका स्त्रियों के लंबे संघर्षपूर्ण इतिहास से भी टकराती हैं और कहीं इस प्रक्रिया में किए गए उपायों की बखिया भी उधेड़ती नज़र आती हैं। इस पुस्तक में ३४ लेखों का संग्रह है जो देश भर के समस्त स्त्री विषयक विमर्शों को समेटता है।

पुस्तक की लेखिका संतोष श्रीवास्तव ने अपने मनोगत भाषण में अपने आप को खुली किताब के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि मैंने कोशिश की औरत से सम्बन्धित हर क्षेत्र की पड़ताल करने की पर बस एक अंश ही लिख पाई हूं। औरत के इतिहास को वर्तमान को लिखना कोई आसान काम नहीं है।

पुस्तक की विशेष चर्चा में प्रमुख वक्ता के तौर पर डा. नगमा जावेद ने पुस्तक की विवेचना की। उन्होंने कहा कि पुस्तक नारी विमर्श के सभी आयामों को प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में केवल वर्तमान नारी विमर्श नहीं है अपितु पिछली सदियों से चल रहे नारी विमर्श का विस्तृत वर्णन है। लेखिका ने हर क्षेत्र की महिलाओं की समस्याओं का अध्ययन बेहद विस्तार और गहराई के साथ प्रमाणों के आधार पर किया है। विशेष चर्चा में भाग ले रहे प्रोफ़ेसर डा. रवीन्द्र कात्यायन ने पुस्तक के पृष्ठ-दर पृष्ठ की चर्चा करते हुए इसे हिन्दी के लिए एक महत्वपूर्ण व अभूतपूर्व ग्रंथ माना।

पुस्तक के लोकार्पण के पश्चात मुख्य अतिथि डा. करुणा शंकर उपाध्याय ने अपने सार गर्भित संक्षिप्त भाषण में लेखिका को इस क्रान्तिकारी कदम उठाने और कलमबद्व करने के लिए बधाई दी और कहा कि यह सर्व स्वागतीय पुस्तक है। स्त्री विमर्श पर लिखी यह पुस्तक शोधार्थियों के लिए एक संदर्भ ग्रन्थ के रूप में जानी जाएगी। गहन चिंतन से पूर्ण यह पुस्तक नाम के अनुरूप हमारे समक्ष कई प्रश्न चिन्ह लगाती है और समाजिक परिवर्तन के ढांचे को बदलने की ओर इंगित करती है। कार्यक्रम के दौरान ही अपार प्रशंसा बटोरती इस पर जे.जे.टी. यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री विनोद टीबड़ेवाला ने लेखिका संतोष श्रीवास्तव को पी एच.डी की मानद उपाधि से अलंकृत करने की घोषणा की।

टी.वी. अभिनेता और डबिंग की दुनिया का जाना पहचाना नाम सोनू पाहूजा ने पुस्तक के कुछ महत्वपूर्ण अंशों को नाटकीय रूप में पेश किया। उन्होंने गर्भपात के समय बनाई गई अल्ट्रासांउड फ़िल्म'साइलेंट स्क्रीम' का दिल दहलाने वाला विवरण पेश किया।

अध्यक्षीय भाषण प्रख्यात कथा लेखिका सुधा अरोड़ा ने कहा कि महिलाएं आज पितृसत्तात्मक और पुरुष वर्चस्व के समाज में जी रही हैं। उंगलियों पर गिने जाने वाले कुछ शीर्षस्थ नामों के बूते पर यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि स्त्री के बड़े तबके में सशक्तीकरण हो चुका है। भारत के न सिर्फ़ गांवों और कस्बों में बल्कि महानगर में रहने वाले आम मध्यवर्गीय तबके में भ्रूण हत्या, दहेज हत्या, बलात्कार, घरेलू हिंसा और कार्यालयों में यौन शोषण विकराल रूप में है। स्त्रियों में जागरूकता लाने के लिए उनकी समस्याओं से मुठभेड़ करती और जमीनी सच्चाई से जूझती वैचारिक पुस्तक की आज सख्त जरूरत है। संतोष की यह पुस्तक इस कसौटी पर खरी उतरती है।

सुमीता केशवा ने सभी का आभार माना तथा लेखिका के लिए दो शब्द कहते हुए उन्होंने कहा कि अब तक संतोष जी के प्यार से सराबोर उपन्यास पढ़ने को मिले हैं परन्तु अब उनकी कलम से ऐसे विस्फ़ोटक राज खुलेंगे जानकर ताज्जुब हुआ। दरअसल औरतों पर हुए जुल्मों का यह संपूर्ण दस्तावेज है।

आलोक भट्टाचार्य ने अपने कुशल संचालन के दौरान कहा कि संतोष ने इस पुस्तक में जिन सच्चाईयों का प्रामाणिक वर्णन किया है वह आज भी घटित हो रही है। समाज नहीं बदला है। समारोह में शहर से तथा बाहर से आए हुए लेखक, पत्रकार तथा साहित्य तथा साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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रिपोर्ट--
सुमीता केशवा

रविवार, 9 जनवरी 2011

40वीं यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन पत्र लेखन प्रतियोगिता संपन्न

पोर्टब्लेयर में स्कूली बच्चों के लिए

40वीं यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन पत्र लेखन प्रतियोगिता संपन्न

पत्र जीवंत रखते हैं खुशनुमा अहसास और संवेदनाएं - के.के. यादव

डाक टिकटों के प्रति दिखा बच्चों का क्रेज 50 से ज्यादा फिलेटलिक डिपाजिट खाता खुले

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अंडमान निकोबार द्वीप समूह के डाक विभाग द्वारा रविवार 2 जनवरी 2011 को सवेरे 10 बजे से 11 बजे तक पोर्टब्लेयर के राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 40वीं यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अंडमान निकोबार द्वीप समूह के डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने किया। पत्र लेखन का विषय था-अपने को जंगल का एक पेड़ मानते हुए अपने मित्र को पत्र लिखें कि जंगलों का संरक्षण क्यों जरूरी है (Image you are a tree living in a forest, write a letter to someone to explain why it is important to protect forest.)

इस अवसर पर निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि डाक विभाग की पत्र लेखन की यह अनूठी पहल किशोरों को डाक सेवाओं के स्वर्णिम आयामों से परिचय कराती है। अभी भी पत्र-लेखन का काफी महत्व है और इसमें भावनाओं का जिस प्रकार प्रकटीकरण होता है वह संचार के अन्य साधनों में नहीं है। पत्र लेखन सिर्फ एक विधा नहीं है बल्कि इसमें रिश्तों की मिठास हो़ती है और पत्रों की भाषा में एक खुशनुमा अहसास होता है जिससे संवेदनाएं जीवंत रहती हैं। श्री यादव ने कहा कि पत्र लेखन सोचने की क्षमता और शब्द ज्ञान में भी वृद्धि करते हैं ऐसे में युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों को इस ओर आकृष्ट करना और भी जरूरी है।



गौरतलब है कि यह प्रतियोगिता अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित की गई थी। डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि पत्र-लेखन प्रतियोगिता में शामिल सभी कापियां पहले सर्किल स्तर पर (पोर्टब्लेयर के लिए कोलकात्ता में) जांची जायेंगीं फिर उनमें से सर्वोत्तम का चयन कर राष्ट्रीय स्तर के लिए डाक निदेशालय दिल्ली भेजी जायेंगीं। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम, दितीय और तृतीय स्तर के लिए क्रमशः 2000, 1500 और 1000 रूपये का नकद पुरस्कार व प्रमाण-पत्र दिया जायेगा। प्रत्येक डाक परिमंडल के लिए हर सर्वोत्तम पत्र को 250 रूपये का प्रोत्साहन नकद पुरस्कार व प्रमाण-पत्र भी दिया जायेगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित इन सर्वोत्कृष्ट तीन पत्रों को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों हेतु भेजा जायेगा, जहाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम, दितीय और तृतीय स्तर के लिए क्रमशः स्वर्ण, रजत और ताम्र मेडल एवं साथ में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन का अधिकारिक डाक टिकटों का अल्बम सम्मानस्वरूप दिया जायेगा।

पोर्टब्लेयर में इस पत्र लेखन प्रतियोगिता में कुल 28 बच्चों ने भाग लिया। अधिकतर प्रतिभागी बच्चे कार्मेल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टब्लेयर राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, विवेकानंद विद्यालय पोर्टब्लेयर और संत मेरी विद्यालय पोर्टब्लेयर के विद्यार्थी थे।

इस अवसर पर डाक टिकटों का एक काउंटर भी लगाया गया, जहाँ बच्चों ने रंग-बिरंगे डाक टिकटों का लुत्फ उठाया। इस अवसर पर उन्हें डाक विभाग की फिलेटलिक डिपाजिट खाता स्कीम के बारे में भी बताया गया, जिसके अंतर्गत कोई न्यूनतम 200 रूपये में खाता खोलकर हर महीने घर बैठे नई डाक टिकटें और अन्य मदें प्राप्त कर सकता है। फिलेटलिक डिपाजिट खाता खोलने में तमाम बच्चों और उनके अभिवावकों ने रूचि दिखाई और लगभग 50 फिलेटलिक डिपाजिट खाता इस अवसर पर खोले गए।

निदेशक डाक सेवाएं

अंडमान व निकोबार द्वीप समूह,

पोर्टब्लेयर-744101